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अन्तराष्ट्रीय श्रम दिवस कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य।।



1 मई को पूरी दुनियाँ में अन्तराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है, यह दिन पूरी दुनियाँ के मजदूरों, मेहनतकशों तथा सर्वहारा वर्ग के नाम रहता है। इस दिन मेहनतकशों को 8 घण्टे काम करने का विशाल आंदोलन खड़ा हुआ था।।
  मेहनतकश, मजदूर वर्ग ने पूरी दुनियाँ के विकास को अपने खून पसीने से सींचा हैं। इस वर्ष का अन्तराष्ट्रीय श्रम दिवस उन्ही करोड़ो मजदूरों के नाम समर्पित है।। हम्हे इस बात को भी आज ढ्यान देना होगा कि इस कोरोना महामारी के चलते आज भी अगर कोई ऐसा वर्ग है जो सबसे ज़्यादा तबाह हो रहा है तो वह श्रमिक वर्ग ही है। अप्रैल 2020 के दूसरे हप्ते में अन्तराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा था कि अकेले भारत मे 40 करोड़ लोग इस लॉक डाउन के चलते गरीबी में फंस सकते है,, सबसे ज़्यादा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को इस लॉक डाउन से तबाही का सामना करना पड़ेगा।। ऐसी विषम परिस्थितियों में जब सर्वहारा वर्ग आज फिर एक बार भूंखमरी की कगार पर पहुँच रहा है , तब फिर से अन्तराष्ट्रीय मजदूर दिवस की यादों को ताजा करना प्रासंगिक हो जाता है।।

  अन्तराष्ट्रीय मजदूर दिवस का संक्षिप्त इतिहास:-

    यह बात शुरू होती है अमेरिका में मजदूर आंदोलनों से वर्ष 1884-85 का दौर अमेरिका आर्थिक मंदी का दौर चल रहा था जिससे बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि हो रही थी और जनता की तकलीफें दिनों दिन बढ़ती जा रही थी, बेरोजगारी और अन्य तकलीफों के चलते लोंगो में असंतोष बढ़ रहा था, उसी दौरान मजदूर यूनियनों ने काम के घण्टे कम करने की मांग को लेकर आंदोलन की शुरुआत की, मजदूर संगठनों की मांग थी कि 8 घण्टे से ज़्यादा श्रमिको से काम न लिया जाय, यद्दपि पहले मजदूरों ने 10 घण्टे काम करने की मांग रखी थी जिसे सफलतापूर्वक लड़ा था।। आपको यह भी बता दूं कि उन दिनों अमेरिका में मजदूरों से 14 घण्टे, 16 घण्टे, 18 घण्टे तक लगातार काम लिया जाना आम बात थी।।
     इस तथ्य को भी गौर करना होगा कि अमेरिका में उन दिनों वेतन बढोत्तरी की मांगों को लेकर भी मजदूर संगठन प्रदर्शन किया करते थे, इस सम्बंध में मशहूर लेखक और प्रकाशक अलेक्जेंडर ट्रेकटंबर्ग ने अपनी किताब मजदूर दिवस के इतिहास में लिखा है कि-
      "हालांकि अमेरिका में अधिक तनख्वाह की मांग को लेकर हड़ताले ज़्यादा होती थी लेकिन जब भी मजदूर यूनियनें अपनी मांगों को सूचीबद्ध करती थीं तो कम घण्टे कम करने की मांग हमेशा केंद्र में रहती थी"
  अमेरिका का शिकागो शहर वामपंथी आंदोलनों के गढ़ था इसलिए मजदूर आंदोलन सबसे ज़्यादा आक्रामक शिकागों में ही हुये।।

    1 मई 1886 का दिन..

  अमेरिका के शिकागो में 1 मई 1886 को काम घण्टे कम किये जाने की मांग को लेकर मजदूर संगठनों ने विशाल आंदोलन खड़ा किया, लगभग सबकुछ ठप्प सा हो गया, मजदूर संगठनों की मांग थी कि 8 घण्टे से ज़्यादा मजदूरों से काम न लिया न जाय,, शिकागो से शुरू हुआ आंदोलन देखते देखते आग की तरह पूरे अमेरिका में फैल जाता है दूसरे व तीसरे दिन अमेरिका में हिंसक घटनाये भी होती है। आंदोलन के चौथे दिन शिकागो शहर की हेमार्केट में मजदूरों का विशाल प्रदर्शन होता है उस दौरान वहां पर किसी के द्वारा बम फेक दिया जाता है और पुलिस प्रदर्शनकारी मजदूरों पर गोलियां चला देती है, कई निर्दोष मजदूर शहीद हो जाते हैं, इस घटना के बाद पहली बार शहीद मजदूरों की याद में 1 मई को शहीद दिवस मनाया जाता हैं।।

पेरिस अन्तराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन 1889

  पेरिस में 1889 में अंतरष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन का आयोजन हुआ पहली बार उस सम्मेलन में ऐलान किया गया कि हेमार्केट नरसंहार में मारे गये निर्दोष मजदूरों की याद में 1 मई को प्रतिवर्ष अंतरष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में मनाया जायेगा। तबसे लगातार 1 मई को अन्तराष्ट्रीय श्रम दिवस मनाया जाता है।। दुनियाँ के लगभग 80 देशों में  1मई को राष्ट्रीय अवकाश रहता है, इस दिन सभी कामगार मजदूर अवकाश पर रहते हैं,, इसी दिन मजदूरों ने यह नारा भी दिया था कि "दुनियाँ के मजदूरों एक हो"। अलग अलग देशों में मजदूर यूनियनें 1 मई को अलग अलग तरह से इसे मनाते हैं।।


  भारत मे मजदूर दिवस की शरुआत..

भारत मे मजदूर दिवस की शुरुआत हुई थी 1 मई 1923 को यह मद्रास में मनाया गया था हालांकि उस समय यह मद्रास दिवस के रूप में मनाया गया था इसकी शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेटयार ने की थी।।
   इसके बाद भारत मे मद्रास उच्च न्यायालय के सामने मजदूरों द्वारा एक बड़ा प्रदर्शन किया गया उस प्रदर्शन में सामूहिक रूप से यह संकल्प लेते हुए यह सहमति बनाई गई कि 1 मई को भारत मे भी प्रतिवर्ष  मजदूर दिवस के रूप में ही मनाया जायेगा, तबसे भारत मे भी प्रतिवर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मानते हैं, इस दिन को कई देशों में may day के नाम से जानते हैं।।
     आपको यह भी बता दूं कि कुछ इतिहासकारों ने अमेरिका के 1 मई 1886 के मजदूर आंदोलन  व हड़ताल को "पूंजीवाद और समाजवाद के मध्य पहली भिड़ंत "बताया था।।
    दोस्तो यह थी कुछ महत्वपूर्ण तथ्यात्मक घटनाये, आपको यह लेख कैसा लगा, कमेंट्स करके अपनी राय अवश्य दे।। धन्यवाद।

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