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PM Cares fund is not a Public Authority under RTI..says PMO. PM Cares फण्ड पर RTI क्यों नही लागू होता?


देश मे जैसे ही कोविड-19 को महामारी घोषित किया गया कि वैसे ही माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने PM Cares  नाम के एक कोष की स्थापना की और पूरे देश को यह संदेश दिया कि यह राहत कोष कोरोना महामारी से लड़ने के लिए है। माननीय मोदी जी ने देशवासियों से इस राहत कोष में दान देने की याद से ज़्यादा अपील भी की।
 PM Cares की स्थापना के बाद से ही इस कोष पर विपक्षी पार्टियों एवम अन्य बुद्धजीवियों के द्वारा सवाल उठाये जा रहे थे, श्रीमती सोनिया गाँधी जी के द्वारा भी इस राहत कोष (PM Cares fund ) को लेकर माननीय प्रधानमंत्री जी को एक चिठ्ठी लिखी गयी और यह आग्रह किया गया कि पीएम केयर्स कोष में अभी तक जमा की गई सम्पूर्ण धनराशि को पूर्व से ही स्थापित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में स्थानांतरित कर दी जाय। सोनिया जी की इस चिट्ठी के बाद भी राजनीति एक बार फिर से शुरू हो गयी थी और PM Cares fund को लेकर चर्चा फिर से तेज़ होना शुरू हो गयी थी।
आपको बताते चले कि इसी दौरान हर्षकान्दूकरी के द्वार सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत PM Cares fund से सम्बन्ध में सम्पूर्ण जानकारी मांगी गई, जिसे PMO द्वारा यह कहते हुये खारिज कर दिया गया कि PM Cares fund  एक Public Authority  नही है इसलिए सूचना के अधिकार अधिनियम के प्राविधान यहाँ लागू नही होते, PMO द्वारा यह भी कहा गया कि यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, इससे संबंधित कोई भी जानकारी वेबसाइट पर जाकर ली जा सकती है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम केयर्स फंड की वेबसाइट पर ट्रस्ट डीड, सरकारी आदेश, नोटिफिकेशन आदि की कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं आरटीआई दाखिल करने वाले हर्ष का कहना है कि “पीएम केयर्स फंड का पब्लिक अथॉरिटी नहीं होने से पता चलता है कि इसे सरकार द्वारा कंट्रोल नहीं किया जा रहा है। ऐसे में इसे कौन कंट्रोल कर रहा है? नाम, ट्रस्ट का गठन आदि से लगता है कि यह पब्लिक अथॉरिटी है। ऐसे में यहां पारदर्शिता की साफ कमी दिखाई दे रही है।” Legal Status of PM Cares Fund ( PM Cares fund की विधिक स्थित।

  माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम पर दी गयी सूचना एवम सूचना के विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी के आधार ओर यह कहा जा सकता है कि PM Cares fund एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, इसमें कुल तीन व्यक्ति है, माननीय प्रधानमंत्री की इस ट्रस्ट के चैयरमैन है और रक्षा मंत्री तथा वित्त मंत्री इस ट्रस्ट की सदस्य है। जबकि यह एक ट्रस्ट है इसलिये इस पर RTI के प्राविधान लागू नही होते, बल्कि ट्रस्ट के तहत इस पर और भी कई तरह की छूट मिलती है जैसे PM Cares को आयकर अधिनियम से पूरी तरह से मुक्त रखा गया है, कंपनी अधिनियम के तहत इसे कॉरपरेट सोशल responsibility के तहत आने वाले खर्चो पर भी लागू किंग गया है, अर्थात कॉर्पोरेट इसमें चंदा देकर उसे CSR में दिखा सकते है। सबसे अहम बात यह है कि इसका ऑडिट एक स्वतंत्र ऑडिटर द्वारा किया जाएगा, न कि सरकारी ऑडिटर तौर पर।  स्वतंत्र ऑडिटर की नियुक्ति ट्रस्ट के अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा ही कि जाएगी। इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि इसमें पारदर्शिता की बिल्कुल कमी है। इसलिए सवाल उठना लाजमी है।

PM Cares की आवश्यकता.

इसे समझने के लिये ये जानना होगा कि क्या इससे पहले भी कोई राहत कोष है? आपको बता दु की देश मे लगभग 70 वर्ष पूर्व से ही एक राहत कोष है, सन 1948 में माननीय जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (पमंदर्फ़ का गठन किया था। उस समय इसके गठन का फौरी तौर पर उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बंटवारे से पैदा हुये हालातो के कारण बेघर हुये लोंगो को राहत पहुँचाना था परन्तु उसके बाद प्राकृतिक आपदाओं, दंगो, आगजनी, भूकंप, बाढ़ या तूफान जैसी आपदाओं के कारण तबाह हुये लोंगो को राहत पहुचाने का कार्य किया जाता है ।  
आपको यह भी बता दूं कि इसके अलावा हर प्रदेश में डिजास्टर राहत कोष होता है और मुख्यमंत्री राहत कोष भी होता है, इसलिए मेरी व्यक्तिगत रॉय ये है कि पूर्व से ही इतने राहत कोष होने के बाद किसी अन्य राहत कोष की आवश्यकता नही थी, और यदि बनाया भी गया था तो उसमें पारदर्शिता को बरकरार रखना चाहिए था तथा और ज़्यादा जवाबदेह होना चाहिये था जिससे विवादों से बचा जा सके। दोस्तो यह लेख कैसा लगा कमेंट्स करके अपनी राय अवश्य बतायें..
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Tags PM cares fund #karimahmad #RTI

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